चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा माइन आरओ में कार्यरत कामगारों का संडे डियूटी बंद किए जाने से पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। प्रबंधन के इस फैसले ने न केवल श्रमिकों की नाराजगी बढ़ा दी है, बल्कि उनके आर्थिक हालात पर भी गंभीर असर डाला है।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व कटगोडी साफ्ट में कार्यरत कर्मचारियों ने संडे डियूट नहीं मिलने के विरोध में काम का बहिष्कार किया था। इसके बाद प्रबंधन द्वारा चार कामगारों को मौखिक रूप से चरचा ईस्ट से चरचा वेस्ट स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और गहरा गया।
इसी मुद्दे को लेकर 1 अप्रैल को लगभग 200 से अधिक कामगार श्रमवीर स्टेडियम में एकत्रित हुए और जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद सभी कर्मचारी क्षेत्रीय विधायक के पास पहुंचे, जहां विधायक के माध्यम से चारों कामगारों को यथावत रखने की मांग रखी गई।
कामगारों का आरोप है कि उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय प्रबंधन ने उल्टा सख्त रुख अपनाते हुए चरचा में कार्यरत सभी कर्मचारियों का संडे डियूटी ही बंद कर दिया। इस फैसले से प्रत्येक कामगार को हर माह लगभग 20 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कामगारों का कहना है कि संडे डियूटी बंद होने से लगातार काम करना पड़ रहा है, जिससे शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ रही है। साथ ही परिवार के साथ समय न मिल पाने से सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इस निर्णय को पूरी तरह श्रमिक विरोधी बताया है।
प्रदर्शनकारी कामगारों ने मांग की है कि चारों स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल पूर्व स्थान पर बहाल किया जाए तथा सभी कर्मचारियों का संडे डियूटी पुनः लागू किया जाए। उनका कहना है कि प्रबंधन उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे मामले पर अब श्रमिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो यूनियन स्तर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है। फिलहाल, कामगारों में भारी आक्रोश है और सभी की निगाहें प्रबंधन व जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
कामगारों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इसमें कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
वहीं, कुछ कामगारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन द्वारा बिना लिखित आदेश के निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति बन रही है। उन्होंने मांग की है कि सभी निर्णय पारदर्शिता के साथ लिखित रूप में जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवाद की स्थिति न बने।
स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। कामगारों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि गंभीरता से पहल करें, तो समाधान जल्द संभव है।
फिलहाल, पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है। क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रबंधन इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।
0 टिप्पणियाँ