नारी शक्ति वंदन अधिनियम का स्वागत, महिला जनप्रतिनिधियों ने बताया ऐतिहासिक कदम, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत का सपना


जिला कोरिया। नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माने जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर जिले की महिला जनप्रतिनिधियों में उत्साह का माहौल है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम बताया है, जो आने वाले समय में राजनीति में महिलाओं की भूमिका को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अधिनियम देश की करोड़ों महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, खेल और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। ऐसे में यह कानून उन्हें और अधिक अवसर प्रदान करेगा तथा उनके आत्मविश्वास को मजबूत करेगा।
जिला पंचायत सदस्य श्रीमती गीता राजवाड़े ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान, विश्वास और अधिकारों को सुनिश्चित करने का मजबूत संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को ‘शक्ति’ का प्रतीक माना गया है, लेकिन लंबे समय तक उनकी भागीदारी संसद और विधानसभाओं में सीमित रही है। यह अधिनियम उस असंतुलन को दूर कर महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त बनाएगा।
जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सौभाग्यवती कुसरो ने कहा कि यह महिलाओं की दशकों पुरानी मांग थी, जो अब साकार हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अधिनियम से महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और देश को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सीधे नीति निर्माण का हिस्सा बनेंगी, तो फैसले अधिक संवेदनशील, समावेशी और दूरदर्शी होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ का वास्तविक अर्थ केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों से सशक्त करना है। अब अधिक महिलाएं संसद और विधानसभाओं तक पहुंचकर समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्रभावी भूमिका निभाएंगी, जिससे एक मजबूत, संतुलित और विकसित भारत की नींव और अधिक सुदृढ़ होगी।

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