चरचा ईस्ट खदान में कामगारों का बड़ा विद्रोह, 10 घंटे ड्यूटी, संडे नहीं मिलने पर सामूहिक बहिष्कार, उत्पादन पर संकट के बादल


चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा ईस्ट खदान में कार्यरत कामगारों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को रीले-सी (Relay-C) में कार्यरत सभी कामगारों ने संडे ड्यूटी का सामूहिक बहिष्कार करते हुए काम बंद कर दिया और विरोध दर्ज कराया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चरचा ईस्ट कटगोडी सॉफ्ट में कार्यरत कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे निर्धारित 8 घंटे के बजाय 10 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जबकि भुगतान केवल 8 घंटे का ही दिया जाता है। इतना ही नहीं, प्रबंधन द्वारा यह भी कहा जाता है कि यदि 10 घंटे काम करेंगे तभी उन्हें संडे (साप्ताहिक अवकाश) दिया जाएगा।

कामगारों ने बताया कि जो कर्मचारी ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं, उन्हें भी साप्ताहिक अवकाश से वंचित रखा जा रहा है, जिससे उनमें भारी नाराजगी व्याप्त है। इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ तीनों पालियों के कामगारों ने एकजुट होकर रविवार को संडे ड्यूटी का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
निर्णय के तहत रविवार को रीले-सी के सभी कामगार काम पर नहीं गए और खदान से वापस लौट गए। कामगारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

इस घटनाक्रम से खदान के कार्य पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं प्रबंधन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कामगारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर वे पूर्ण कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने जैसी रणनीति अपनाएंगे।

कामगारों का कहना है कि श्रम कानूनों के तहत 8 घंटे से अधिक कार्य कराना नियमों के विरुद्ध है, और यदि अतिरिक्त समय तक काम लिया जाता है तो उसके लिए ओवरटाइम का भुगतान किया जाना चाहिए। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर यूनियन के पदाधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं और जल्द ही प्रबंधन के साथ बैठक की संभावना जताई जा रही है। यूनियन नेताओं का कहना है कि वे कामगारों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो उच्च स्तर तक इस मामले को उठाया जाएगा।

इधर, खदान में अचानक हुए इस बहिष्कार से उत्पादन कार्य प्रभावित होने की आशंका है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की कोयला आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह कामगारों की समस्याओं का समाधान किस प्रकार करता है।

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