चरचा कॉलरी।कोयलांचल क्षेत्र का चरचा इन दिनों भीषण गर्मी की मार के बीच गहरे पेयजल संकट से जूझ रहा है। तापमान रोज नए रिकॉर्ड छू रहा है, लेकिन राहत के नाम पर व्यवस्थाएं पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। वर्षों से गर्मी के मौसम में लगने वाले प्याऊ इस बार पूरी तरह गायब हैं, जबकि ठंडे पानी के लिए लगाए गए फ्रिजर बंद पड़े हैं या सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गए हैं।
पोनी पंसारी बाजार में ठंडे पानी की सुविधा ठप.......
नगर पालिका द्वारा पोनी पंसारी स्थित रोजाना लगने वाले सब्जी बाजार और साप्ताहिक हाट बाजार में लोगों को राहत देने के लिए ठंडे पानी का फ्रिजर लगाया गया था। यह सुविधा बाजार आने वाले सैकड़ों लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह बंद पड़ी है।
जानकारी के अनुसार, महीनों पहले अज्ञात चोरों ने फ्रिजर से जुड़ा बिजली का बॉन्ड (कनेक्शन) उखाड़ कर चोरी कर लिया। इसके बाद से यह फ्रिजर निष्क्रिय पड़ा हुआ है और ठंडे पानी की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई.......
स्थानीय स्तर पर इस समस्या की जानकारी भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है। पोनी पंसारी में बने शौचालय में कार्यरत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली महिला कर्मचारी ने इस मामले से मेन सुपरवाइजर सावित्री देवांगन को अवगत कराया था।
इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भीषण गर्मी में बाजारवासियों की बढ़ी परेशानी.......
तेज गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बाजार आने वाले लोगों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूर वर्ग को पीने के ठंडे पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
पुराने फ्रिजर बने शोपीस
टावर चौक स्थित हनुमान मंदिर और श्रमवीर स्टेडियम के पास पूर्व में लगाए गए फ्रिजर भी अब अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। इनमें पानी तो आता है, लेकिन वर्षों से ठंडा नहीं हो रहा। रखरखाव के अभाव में ये उपकरण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
जहां एक ओर सरकार और प्रशासन गर्मी से राहत के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि एक साधारण फ्रिजर तक को ठीक नहीं कराया जा सका है।
‘गरम पानी’ ही विकल्प, जनता परेशान
भीषण गर्मी और लू के बीच जब ठंडे पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब लोगों को गर्म पानी पीना पड़ रहा है। टावर चौक, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भारी भीड़ रहती है, लेकिन वहां कोई प्रभावी पेयजल व्यवस्था नजर नहीं आती।
लापरवाही की खुलती परतें
प्याऊ का न लगना, बाजार का फ्रिजर बंद रहना और पुराने फ्रिजरों का बेकार हो जाना—ये सभी घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही की साफ तस्वीर पेश कर रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते देखरेख और मरम्मत होती, तो आज हालात इतने खराब नहीं होते।
जनता में आक्रोश, तत्काल समाधान की मांग
लगातार बढ़ती समस्याओं के चलते लोगों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि योजनाएं शुरू तो की जाती हैं, लेकिन उनके रखरखाव को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।
लापरवाही पर उठे सवाल, जल्द सुधार की मांग......
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक फ्रिजर का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की लापरवाही का उदाहरण है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत कर दी जाती, तो आज सैकड़ों लोगों को राहत मिल सकती थी।
लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि तत्काल फ्रिजर की मरम्मत कर ठंडे पानी की व्यवस्था बहाल की जाए, साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
गौरतलब है कि चरचा क्षेत्र में पहले ही प्याऊ व्यवस्था ठप है, ऐसे में बाजारों में भी ठंडे पानी की सुविधा बंद होना आमजन के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस समस्या पर संज्ञान लेते हैं।
बड़ा सवाल:
आखिर कब तक चरचा की जनता इस लापरवाही का खामियाजा भुगतती रहेगी? और कब जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राहत पहुंचाने के लिए सक्रिय होंगे।
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