मोहर्रम की 8वीं तारीख पर चरचा कॉलरी में निकला अकीदत का भव्य जुलूस, ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंजा माहौल

चरचा कॉलरी। इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की 8वीं तारीख पर चरचा कॉलरी में आस्था, श्रद्धा और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला। हज़रत इमाम हसन और हज़रत इमाम हुसैन की याद में मुस्लिम समुदाय द्वारा भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
‘या हुसैन’ की गूंज से पूरा क्षेत्र श्रद्धामय वातावरण में डूब गया। मस्जिद परिसर से प्रारंभ हुआ यह जुलूस विवेकानंद कॉलोनी तक विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस में शामिल लोगों ने मातमी धुनों और धार्मिक नारों के साथ कर्बला के महान शहीदों को याद किया तथा उनकी कुर्बानी को सलाम किया।
अखाड़ों और पारंपरिक करतबों ने बांधा समां

जुलूस के दौरान युवाओं और बच्चियों द्वारा पारंपरिक नुमाइशी खेल (अखाड़ा) एवं हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया गया। तलवारबाजी, लाठी-कला और अन्य पारंपरिक खेलों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रदर्शनों ने मोहर्रम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों ने खड़े होकर इन प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

मोहर्रम जुलूस को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। उप पुलिस अधीक्षक आशा सेन एवं थाना प्रभारी उप निरीक्षक आनंद सोनी के नेतृत्व में जुलूस मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था और सतत निगरानी के चलते पूरा आयोजन सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इंसानियत और न्याय की मिसाल है कर्बला

मोहर्रम केवल मातम का अवसर नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई सर्वोच्च कुर्बानी की याद भी है। कर्बला की जंग में हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, मानवता और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
मोहर्रम की 8वीं तारीख पर निकला यह जुलूस चरचा कॉलरी में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने लोगों के दिलों में कर्बला के शहीदों की याद को एक बार फिर ताजा कर दिया।
समाज के विभिन्न वर्गों ने किया स्वागत

जुलूस मार्ग में कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा जुलूस का स्वागत किया गया। जगह-जगह पेयजल एवं शरबत की व्यवस्था की गई, जहां अकीदतमंदों ने रुककर ताज़गी प्राप्त की। लोगों ने मोहर्रम के पवित्र अवसर पर एक-दूसरे को भाईचारे और सद्भाव का संदेश देते हुए सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
बच्चों और युवाओं में दिखा विशेष उत्साह

मोहर्रम के इस धार्मिक आयोजन में बच्चों और युवाओं की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं ने अखाड़ा प्रदर्शन के माध्यम से अपनी कला और अनुशासन का परिचय दिया, वहीं बच्चियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक एवं पारंपरिक प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। आयोजन में नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।
मोहर्रम की तैयारियों में जुटी अंजुमन कमेटी

जुलूस को सफल बनाने में अंजुमन इस्लामिया कमेटी एवं मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कई दिनों से चल रही तैयारियों के बाद जुलूस को सुव्यवस्थित ढंग से निकाला गया। कमेटी के सदस्यों ने जुलूस में शामिल लोगों से अनुशासन बनाए रखने और शांति एवं सौहार्द के साथ आयोजन संपन्न करने की अपील की, जिसका सभी ने पालन किया।
10वीं मोहर्रम को निकलेगा मुख्य ताजिया जुलूस

मोहर्रम की 8वीं तारीख पर निकले इस जुलूस के बाद अब समुदाय की निगाहें 10वीं मोहर्रम (यौमे आशूरा) पर होने वाले मुख्य ताजिया जुलूस पर टिकी हैं। इस अवसर पर भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन और आयोजन समिति ने इसके लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

मोहर्रम का यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान, इंसानियत और भाईचारे की उस अमर विरासत का प्रतीक है, जो सदियों बाद भी लोगों को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। चरचा कॉलरी में निकला यह भव्य जुलूस इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना।

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