जिला कोरिया। कोयला उद्योग के लाखों श्रमिकों के वेतन, सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता-12 (JBCCI-XII) के गठन में हो रही लगातार देरी को लेकर अखिल भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ बीएमएस ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार सुबह संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुट होकर चरचा बेस्ट मुहाड़े पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और कोल इंडिया प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
मजदूर नेताओं ने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता-11 (NCWA-11) की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त होने जा रही है, लेकिन अब तक JBCCI-12 के गठन और वेतन वार्ता प्रक्रिया को शुरू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे देशभर के कोयला श्रमिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
संघ के महामंत्री सुजीत सिंह द्वारा कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संगठन ने इस मुद्दे को लेकर 13 अप्रैल 2026 को भी प्रबंधन को पत्र भेजकर समय रहते समिति गठन और वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
25 जून से 30 जून तक देशभर में आंदोलन
अखिल भारतीय कोयला खदान संघ बीएमएस ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 25 जून से 30 जून 2026 तक कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों तथा सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड की खदानों, महाप्रबंधक कार्यालयों, क्षेत्रीय कार्यालयों और कंपनी मुख्यालयों के समक्ष धरना-प्रदर्शन, गेट मीटिंग एवं पिट मीटिंग आयोजित करने का निर्णय लिया है।
संघ का कहना है कि यह आंदोलन केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिकों के भविष्य, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं, भत्तों और अन्य सेवा संबंधी अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। यदि समय रहते JBCCI-12 का गठन नहीं किया गया और वार्ता प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
चरचा में दिखी मजदूरों की एकजुटता
चरचा बेस्ट मुहाड़े पर आयोजित धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से जल्द से जल्द JBCCI-12 समिति का गठन कर वेतन समझौते की प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग की। श्रमिकों का कहना था कि हर बार वेतन समझौते में अनावश्यक देरी से कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लाखों कोयला कर्मियों की निगाहें JBCCI-12 पर
देशभर के कोयला उद्योग में कार्यरत लाखों कर्मचारियों और श्रमिकों की निगाहें अब आगामी वेतन समझौते पर टिकी हुई हैं। इसी समझौते के माध्यम से वेतनमान, भत्तों, चिकित्सा सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवा शर्तों का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में समझौते के गठन में हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों में चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
प्रबंधन पर बढ़ेगा दबाव
कोयला क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि देशभर की खदानों में एक साथ आंदोलन तेज होता है तो कोल इंडिया प्रबंधन पर जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने और JBCCI-12 के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पूरे कोयला उद्योग में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
फिलहाल, लाखों कोयला श्रमिकों की निगाहें कोल इंडिया प्रबंधन के अगले कदम और JBCCI-12 के गठन को लेकर होने वाली संभावित घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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