डॉक्टर विहीन शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार, मरीजों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं, 20 बिस्तरीय अस्पताल की घोषणा भी कागजों तक सीमित, भवन हो रहा जर्जर


जिला कोरिया। नगर पालिका शिवपुर-चरचा के वार्ड क्रमांक 6 स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। क्षेत्र की हजारों की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्र में विगत लगभग एक वर्ष से कोई नियमित डॉक्टर पदस्थ नहीं है, जिससे मरीजों को उपचार के लिए बैकुंठपुर अथवा अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा यहां दो डॉक्टरों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लंबे समय से दोनों चिकित्सक अस्पताल में सेवाएं नहीं दे रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान यह स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रवासियों के लिए वरदान साबित हुआ था और यहां की कार्यप्रणाली को देखते हुए तत्कालीन विधायक श्रीमती अंबिका सिंहदेव ने इसे 20 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भी अस्पताल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। न तो अस्पताल का विस्तार हो सका और न ही डॉक्टरों की नियमित व्यवस्था की गई। विडंबना यह है कि कोरिया जिले से विभाजित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विधायक श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वयं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं, इसके बावजूद चरचा का यह स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहा है।
अस्पताल भवन की हालत भी लगातार खराब होती जा रही है। भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं और कई हिस्से जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भवन की मरम्मत और रखरखाव की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
इस मामले में नगर पालिका शिवपुर-चरचा की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती लालमुनि यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चरचा क्षेत्र में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय की "ट्रिपल इंजन सरकार" होने के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं होना और भवन का जर्जर होना शासन-प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि अस्पताल में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, भवन की मरम्मत कराई जाए तथा पूर्व में घोषित 20 बिस्तरीय अस्पताल के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित चरचा क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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1 टिप्पणियाँ

  1. उस हॉस्पिटल के नाम से सभी स्टाफ की पोस्टिंग हो गई है सभी इधर उधर सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन हॉस्पिटल सही स्थिति में न होने की वजह से वहां कोई नहीं जा रहा।

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