जिला कोरिया/अम्बिकापुर। जिंदगी और मौत के बीच चल रही जंग में जब हर सेकंड कीमती होता है, तब सही समय पर लिया गया फैसला किसी चमत्कार से कम नहीं होता। ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला और प्रेरणादायक मामला अम्बिकापुर से सामने आया है, जहां एम्बुलेंस में तैनात स्वास्थ्य टीम ने अपनी सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक नवजात शिशु को नई जिंदगी दे दी।
चलती एम्बुलेंस में बिगड़ी हालत, थम गई धड़कनें
एक दिन के नवजात को गंभीर हृदय समस्या के चलते बेहतर इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया था। एम्बुलेंस अम्बिकापुर से रायपुर की ओर बढ़ रही थी, तभी रास्ते में अचानक बच्चे की स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। मॉनिटर पर हृदय गति गिरकर मात्र 38 प्रति मिनट तक पहुंच गई—जो नवजात के लिए बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है।
फोन पर विशेषज्ञ से संपर्क, तुरंत शुरू हुआ संघर्ष
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एम्बुलेंस में मौजूद ईएमटी संतोष कुमार सिंह ने बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. पंकज से संपर्क किया। फोन पर मिले निर्देशों के आधार पर टीम ने तत्काल नवजात को सीपीआर देना शुरू कर दिया।
5 मिनट का ‘गोल्डन पीरियड’, और फिर चमत्कार
करीब पांच मिनट तक चले इस जीवन-मरण के संघर्ष में टीम ने हार नहीं मानी। लगातार प्रयासों का असर दिखा और धीरे-धीरे बच्चे की धड़कनें लौटने लगीं—पहले 78, फिर 80 और अंततः 120 प्रति मिनट तक पहुंच गईं। यह पल पूरी टीम के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
मानवता और प्रोफेशनलिज्म की मिसाल बनी टीम
बच्चे की हालत स्थिर होते ही एम्बुलेंस को तेजी से रायपुर पहुंचाया गया, जहां उसे सुरक्षित रूप से अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस पूरे ऑपरेशन में ईएमटी संतोष कुमार सिंह, पायलट तीरथ यादव, ईएमई राकेश सुतवंशी और पीएम शैलेश की टीम ने बेहतरीन तालमेल और साहस का परिचय दिया।
हर ओर हो रही सराहना
डॉ. पंकज के सटीक मार्गदर्शन और टीम के समर्पण ने एक मासूम की जिंदगी बचाकर स्वास्थ्य सेवाओं का मान बढ़ाया है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में एम्बुलेंस टीम की जमकर सराहना हो रही है।
यह घटना न केवल चिकित्सा सेवाओं की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो चलते वाहन में भी जिंदगी को वापस लाया जा सकता है।
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