जिला कोरिया। सरगुजा संभाग में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल के सार्वजनिक संदेश के बाद पुलिस कार्रवाई ने गति पकड़ ली है। मंत्री के बयान के करीब 24 घंटे के भीतर अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने राजहंस बस के संचालक इरशाद आलम सहित छह लोगों के विरुद्ध विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार अपराध क्रमांक 0510/2026 में इरशाद आलम, ज़िसान आलम, दिलशाद आलम, सलमान तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ शिकायत के आधार पर जान से मारने की धमकी देने और सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने जैसे आरोप दर्ज किए गए हैं। एफआईआर में फरार बताए गए आरोपी शाबिर आलम और उसके पुत्र कामरान साबरी का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही मंत्री राजेश अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सरगुजा जैसे शांत क्षेत्र में अपराधियों तथा उन्हें संरक्षण देने वालों के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित व्यक्तियों से जुड़े कुछ पुराने प्रकरण भी दर्ज हैं। वर्ष 2024 में शाबिर आलम के विरुद्ध मारपीट, गाली-गलौज और धमकी से संबंधित मामला दर्ज हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में कामरान साबरी, सलमान उर्फ करिया एवं अन्य के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण कायम किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुराने मामलों में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा चुकी है।
इधर, पिछले महीने झारखंड के चर्चित गैंगवार से जुड़े कुछ आरोपियों के अंबिकापुर में रहने संबंधी खबरें सामने आने के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजहंस बस से जुड़े एक अन्य प्रकरण में अपराध दर्ज किया था। उसी के बाद से पूरे मामले पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार सरगुजा रेंज के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम की लगातार निगरानी कर रहे हैं। विवेचना के दौरान यदि नए तथ्य या साक्ष्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच मंत्री राजेश अग्रवाल ने आम लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।
उल्लेखनीय है कि एफआईआर दर्ज होना आरोप सिद्ध होने के समान नहीं है। मामले में सभी आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
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