कोरिया में एग्रो इनपुट डीलर्स का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, प्रधानमंत्री तक पहुंचाई आवाज — 6 प्रमुख मांगों पर कार्रवाई की मांग

 
जिला कोरिया। कृषि आदान व्यापारियों की बढ़ती समस्याओं को लेकर अब आंदोलन की आहट तेज हो गई है। सरगुजा संभाग के अंतर्गत कार्यरत एफएएस एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम कलेक्टर कोरिया को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी लंबित मांगों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

एसोसिएशन का दावा है कि वह देशभर के लगभग 5 लाख एग्रो इनपुट व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो पिछले एक दशक से लगातार केंद्र और राज्य सरकारों से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे व्यापारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
 6 अहम मांगों ने खींचा ध्यान

ज्ञापन में व्यापारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से रखा है उर्वरकों पर जबरन लिंकिंग की व्यवस्था समाप्त की जाए,‌ सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पाद जोड़कर बेचने की बाध्यता खत्म हो, “फॉर फ्री ऑन रोड” आपूर्ति प्रणाली लागू हो, ताकि कंपनियां खुद डिलीवरी करें, डीलर मार्जिन बढ़ाकर न्यूनतम 8% किया जाए, ‘साथी पोर्टल’ की अनिवार्यता में ढील दी जाए, विशेषकर ग्रामीण विक्रेताओं के लिए, बीज नीति में स्पष्टता लाई जाए और अवैध बिक्री पर सख्ती के साथ अधिकृत डीलरों को संरक्षण मिले, सीलबंद पैकिंग में गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की तय हो, विक्रेता को ‘साक्षी’ का दर्जा मिले

 आर्थिक दबाव में छोटे व्यापारी

एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा नीतियों के कारण छोटे और ग्रामीण स्तर के डीलर्स पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। परिवहन, भंडारण और अन्य खर्चों के बीच कम मार्जिन के चलते व्यापार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

🌾 किसानों पर खंपड़ सकता है सीधा असर

व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। खाद, बीज और कीटनाशक की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे खेती-किसानी के कार्य बाधित होने की आशंका है।

 सरकार के लिए चेतावनी संकेत

कृषि क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले इनपुट डीलर्स की नाराजगी अब खुलकर सामने आ चुकी है। यह सरकार के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जमीनी स्तर पर नीतिगत बदलाव की जरूरत है।अगर मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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