चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा माइन आर.ओ. में रविवार ड्यूटी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रबंधन द्वारा जारी आदेश के बाद कामगारों में भारी असंतोष फैल गया, जिसका असर रविवार को साफ तौर पर देखने को मिला जहां तीनों पालियों के अधिकांश कामगारों ने ड्यूटी का बहिष्कार कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इससे पहले रविवार की ड्यूटी बंद कर दी गई थी, जिससे कामगारों में नाराजगी पनप रही थी।
इसी बीच एसईसीएल प्रबंधन ने 26 अप्रैल 2026 से पुनः रविवार ड्यूटी प्रारंभ करने का आदेश जारी किया। जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि चरचा माइन आर.ओ. के सभी अधिकारी, स्टाफ और कर्मचारी उत्पादन कार्य के लिए रविवार को उपस्थित रहेंगे। प्रबंधन द्वारा तय शर्तों के अनुसार, रविवार ड्यूटी के लिए कामगारों की पात्रता निर्धारित की गई है।
इसमें सप्ताह में कम से कम 4 दिन उपस्थिति तथा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक अंडरग्राउंड कर्मचारियों के लिए 190 दिन और सरफेस कर्मचारियों के लिए 240 दिन की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है। साथ ही DR और MR श्रेणी के कर्मचारियों को सूची के अनुसार ही ड्यूटी पर बुलाने की बात कही गई है, जबकि लाइट ड्यूटी पर कार्यरत कर्मियों को रविवार को विश्राम दिवस घोषित किया गया है।
कामगारों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा जारी नियमों के बावजूद सभी पात्र कामगारों को ड्यूटी नहीं दी जा रही है। केवल चुनिंदा नामों की सूची जारी की गई, जिससे बाकी कामगारों में आक्रोश और बढ़ गया। उनका कहना है कि यदि नियम समान हैं तो सभी पात्र कर्मियों को समान अवसर मिलना चाहिए। रविवार को विरोध का असर इस कदर रहा कि चरचा से कटगोड़ी साइड जाने वाली बसें लगभग खाली रहीं। कुछ बसों में केवल 1 से 4 कामगार ही ड्यूटी पर जाते नजर आए, जबकि अधिकांश ने सामूहिक रूप से रविवार ड्यूटी का बहिष्कार किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एसईसीएल प्रबंधन की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कामगारों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, और अब सभी की नजर प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है क्या कामगारों की मांगों पर विचार होगा या विवाद और गहराएगा, यह आने वाला समय बताएगा। रविवार ड्यूटी विवाद अब केवल असंतोष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठित विरोध का रूप लेने लगा है। कामगार संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई और सभी पात्र कामगारों को समान अवसर नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। कामगार नेताओं का कहना है कि प्रबंधन द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा। पात्रता पूरी करने वाले कई कामगारों को ड्यूटी सूची से बाहर रखा गया है, जिससे “चयन में पक्षपात” की आशंका गहरा गई है। उन्होंने मांग की है कि पूरी सूची सार्वजनिक की जाए और चयन का आधार स्पष्ट किया जाए। रविवार को हुए बहिष्कार के बाद उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि इसी तरह विरोध जारी रहा, तो आने वाले दिनों में कोयला उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे कंपनी के लक्ष्य पर सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में संवाद ही सबसे बड़ा समाधान हो सकता है। यदि प्रबंधन और कामगारों के बीच जल्द ही सकारात्मक बातचीत नहीं हुई, तो यह विवाद और गहरा सकता है।कामगारों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है सभी पात्र कर्मचारियों को समान रूप से रविवार ड्यूटी दी जाए, ड्यूटी सूची में पारदर्शिता लाई जाए, चयन प्रक्रिया का स्पष्ट आधार बताया जाए, भविष्य में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। फिलहाल चरचा माइन क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। कामगार एकजुट नजर आ रहे हैं और प्रबंधन की अगली पहल पर पूरे घटनाक्रम की दिशा निर्भर करेगी। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद बड़े श्रमिक आंदोलन का रूप ले सकता है।
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