जैविक खेती की ओर बढ़ता कोरिया: कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने केशगंवा में जैव उत्पादक केंद्र का किया शुभारंभ

जिला कोरिया। जिले के वनांचल क्षेत्र सोनहत में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने ग्राम पंचायत केशगंवा में स्थापित जैव उत्पादक केंद्र का फीता काटकर शुभारंभ किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित यह केंद्र क्षेत्र के किसानों को कम लागत में जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराएगा और प्राकृतिक खेती को नई दिशा देगा।

शुभारंभ अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेंद्र श्रीवास, जनपद पंचायत सोनहत के सीईओ मनोज जगत, बिहान टीम के तरुण सिंह, मस्तराम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
"जैविक खेती ही भविष्य की खेती" – कलेक्टर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा कि आने वाला समय जैविक खेती का है। देश-विदेश के बाजारों में जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और उपभोक्ता इन्हें अधिक कीमत देकर भी खरीद रहे हैं। ऐसे में किसानों के लिए जैविक खेती आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है।

उन्होंने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा स्थानीय वनस्पतियों से तैयार किए जा रहे जैविक कीटनाशक एवं उत्पादवर्धक घोल का उपयोग कर किसान अपनी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ा सकते हैं।
70 किसान पहले ही जुड़ चुके हैं अभियान से

सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कलेक्टर को बताया कि शुरुआत में उन्हें भी जैविक उत्पादों के लाभ की जानकारी नहीं थी। लेकिन जब उन्होंने अपने खेतों में सब्जियों एवं अन्य फसलों पर इनका प्रयोग किया तो सकारात्मक परिणाम मिले। इसके बाद आसपास के किसानों को भी इसकी जानकारी दी गई। वर्तमान में लगभग 70 किसान इस जैव उत्पादक केंद्र से जुड़ चुके हैं और अपनी खेती में जैविक कीटनाशक तथा उत्पादवर्धक घोल का उपयोग कर रहे हैं।

कम लागत में मिलेगा प्रभावी जैविक उपचार

ग्राम संगठन एवं सीएलएफ की आर्थिक सहायता से स्थापित इस केंद्र में नीमास्त्र, दशपर्णी घोल, फुल्विक एसिड घोल सहित कुल आठ प्रकार के जैविक कीटनाशक और उर्वरक तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की कीमत बाजार की तुलना में काफी कम रखी गई है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इनका उपयोग कर सकें।

समूह की महिलाओं ने बताया कि जैविक घोल की थोड़ी-सी मात्रा को पानी में मिलाकर एक पूरी टंकी तैयार की जाती है, जिससे लगभग एक एकड़ फसल का प्रभावी उपचार किया जा सकता है। इससे किसानों की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और खेती पर्यावरण के अनुकूल भी बनती है।

ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार, किसानों को मिलेगा लाभ

केशगंवा का यह जैव उत्पादक केंद्र केवल किसानों को जैविक उत्पाद उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत भी बनेगा। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा।

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