जिला कोरिया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोनहत विकासखंड के आईएफसी क्लस्टर कटगोड़ी में देशी मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ब्रूडिंग सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां वर्तमान में 500 देशी चूजों का वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण किया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को परंपरागत सहकृषि गतिविधियों से आगे बढ़ाकर स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के भ्रमण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुरूप कटगोड़ी संकुल स्तरीय संगठन द्वारा संचालित आजीविका सेवा केंद्र में ब्रूडिंग सेंटर की स्थापना की गई है। यहां चूजों को लगभग 28 दिनों तक सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त वातावरण में तैयार किया जाता है। इसके बाद इन विकसित चूजों का वितरण क्षेत्र के किसानों को किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण देशी चूजे उपलब्ध होंगे और मुर्गी पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रूडिंग पद्धति से चूजों की प्रारंभिक देखभाल बेहतर ढंग से होती है, जिससे उनकी जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद रहती है।
प्रमिला लखपति दीदी बनीं प्रेरणा
इस ब्रूडिंग सेंटर का संचालन प्रमिला लखपति दीदी कर रही हैं। पिछले चार महीनों से उनके कुशल प्रबंधन और निरंतर प्रयासों के चलते आजीविका सेवा केंद्र को 35 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो चुकी है। उनकी सफलता अब क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। इस मॉडल के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह मिल रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेंद्र श्रीवास ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत विकसित यह मॉडल भविष्य में अधिक से अधिक किसानों को देशी मुर्गी पालन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी, पोषण सुरक्षा मजबूत होगी और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
कटगोड़ी का यह ब्रूडिंग सेंटर इस बात का उदाहरण बन रहा है कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलें तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि पूरे गांव की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।
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