विज्ञान की राह पर सूरजपुर की बेटी – आईआईटी भिलाई में पीएचडी कर रही हैं निशी केशरी



जिला कोरिया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सूरजपुर जिले की होनहार बेटी निशी केशरी आज अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर एक ऐसी ऊँचाई पर पहुँची हैं, जहाँ पहुँचने का सपना लाखों छात्र-छात्राएँ देखते हैं। उनकी सफलता की यह प्रेरणादायक कहानी जिले की बेटियों के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संदेश देती है।

निशी केशरी ने अपनी उच्च शिक्षा की शुरुआत अंबिकापुर स्थित श्री साईं बाबा आदर्श महाविद्यालय से की, जहाँ उन्होंने बीएससी (सूक्ष्मजीव विज्ञान) में 75.94 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक यात्रा की मजबूत नींव रखी। इसके बाद उन्होंने शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सूरजपुर से एमएससी (रसायन विज्ञान) में 84.29 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की और अपनी मेधा का उत्कृष्ट परिचय दिया।

पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया। उन्होंने स्वामी आत्मानंद शासकीय मॉडल स्कूल में रसायन विज्ञान की अतिथि व्याख्याता के रूप में सेवाएँ दीं और विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति प्रेरित किया।

निशी ने वर्ष 2018 में केरल के अमृतापुरी में आयोजित “यूथ इंडिया लीडर्स ट्रेनिंग समिट” में भी भाग लिया, जहाँ उन्हें नेतृत्व कौशल का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्होंने देश की प्रतिष्ठित GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering) परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी तकनीकी दक्षता को और मजबूत किया।

वर्तमान में निशी केशरी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध विषय “ऊर्जा भंडारण उपकरणों और विद्युत वाहन प्रौद्योगिकी के लिए लिथियम-आयन एवं सोडियम-आयन बैटरियों का उन्नयन” है। यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक अहम योगदान माना जा रहा है।

सूरजपुर के एक साधारण परिवेश से निकलकर देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान तक पहुँची निशी केशरी की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी उपलब्धि जिले की हर बेटी को यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता निश्चित है।

यह कहानी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

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