तेंदूपत्ता तोड़ने गए ग्रामीणों पर मधुमक्खियों का हमला, 10 वर्षीय बच्चा समेत पांच घायल, करमडॉड़ गांव में दहशत का माहौल, चरचा श्रमिक चौक पर भी मंडरा रहा खतरा


चरचा कॉलरी। ग्राम पंचायत खरवत अंतर्गत ग्राम करमडॉड़ में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल गए ग्रामीणों पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस हमले में एक 10 वर्षीय बच्चे सहित पांच लोग घायल हो गए। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है।

जानकारी के अनुसार ग्रामीण जंगल क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों का झुंड भड़क उठा और वहां मौजूद लोगों पर टूट पड़ा। मधुमक्खियों के हमले से लोग अपनी जान बचाने इधर-उधर भागने लगे, लेकिन तब तक कई लोग उनकी चपेट में आ चुके थे।

घायलों में महेश कुमार सारथी, बबली सारथी, श्यामकली नायक, गुरमी बाई एवं एक 10 वर्षीय बच्चा शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए सभी घायलों को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।

घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। तेंदूपत्ता सीजन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी जंगल जाते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

इधर चरचा क्षेत्र के श्रमिक चौक में भी भारी संख्या में मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता लंबे समय से बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस छत्ते से निकलने वाली मधुमक्खियां आए दिन राहगीरों और मजदूरों पर हमला कर रही हैं। कई लोग घायल भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग अब तक इसे हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रमिक चौक में बने मधुमक्खियों के छत्ते को तत्काल हटाया जाए तथा जंगल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

ग्रामीणों ने बताया कि मधुमक्खियों के हमले के दौरान जंगल में मौजूद कई महिलाएं और बच्चे भय के कारण काफी देर तक इधर-उधर छिपे रहे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनाटा पसरा रहा। आसपास मौजूद लोगों ने धुआं कर और कपड़े लहराकर मधुमक्खियों को भगाने का प्रयास किया, तब जाकर स्थिति नियंत्रित हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता सीजन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजाना जंगलों में जाते हैं, लेकिन वन क्षेत्रों में सुरक्षा और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाओं का अभाव बना रहता है। यदि समय पर घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

वहीं चरचा श्रमिक चौक में बने विशाल पेड़ पर मधुमक्खी छत्ते को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। मजदूरों और राहगीरों ने बताया कि सुबह और शाम के समय मधुमक्खियां अधिक आक्रामक हो जाती हैं, जिससे लोगों को वहां से गुजरने में डर लगने लगा है। कई बार स्कूली बच्चे और बाजार आने-जाने वाले लोग भी इनके हमले का शिकार हो चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, वन विभाग और नगर पालिका से संयुक्त रूप से अभियान चलाकर खतरनाक स्थानों से मधुमक्खियों के छत्ते हटाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि जंगल क्षेत्रों में होने वाली इस प्रकार की घटनाओं से लोगों की जान बचाई जा सके।

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