भीषण गर्मी में चरचा की प्यास, खबर छपते ही हरकत में आया प्रशासन, चौक-चौराहों पर शुरू हुई राहत व्यवस्था, लेकिन सवाल बरकरार है एसईसीएल कब श्रमिकों कि जरुरत पूरी करता है पेयजल व्यवस्था.......


चरचा कॉलरी। कोयलांचल क्षेत्र की जीवनरेखा कहे जाने वाले चरचा कॉलरी में इस बार गर्मी ने लोगों की परीक्षा ले ली। अप्रैल के अंतिम दिनों में ही तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि राहगीरों को एक घूंट ठंडे पानी के लिए तरसना पड़ रहा था।

स्थानीय नागरिकों में आक्रोश इस बात को लेकर बढ़ता जा रहा था कि हर साल जहां प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ लगाकर राहत दी जाती थी, वहीं इस बार जिम्मेदार विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहे थे। लोगों का कहना था कि भीषण गर्मी में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

गौरतलब है कि पूर्व वर्षों में एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा माइंस आरओ तथा सौम्य महिला मंडल द्वारा राजीव गांधी चौक और गटगोडी साफ्ट क्षेत्र में नियमित रूप से ठंडे पानी की व्यवस्था की जाती रही है। इन प्रयासों से राहगीरों और मजदूरों को बड़ी राहत मिलती थी, लेकिन इस बार ऐसी कोई पहल नजर नहीं आई।

इसी बीच, आपकी बात लाइव व दैनिक समाचार पत्र ने इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए खबर प्रकाशित की, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। खबर का असर इतना तेज रहा कि नगर पालिका शिवपुर चरचा के अधिकारी वशिष्ठ कुमार ओझा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मजदूर दिवस के अवसर पर नगर पालिका द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए चरचा क्षेत्र के प्रमुख चौक-चौराहों पर घड़े रखवाकर ठंडे पानी की व्यवस्था शुरू कर दी गई। इस पहल से जहां आम जनता को राहत मिली, वहीं लोगों ने नगर पालिका प्रशासन और आपकी बात लाइव समाचार पत्र की सक्रियता की सराहना भी की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह प्रशासन समय रहते जागरूकता दिखाए, तो भीषण गर्मी में आमजन को होने वाली परेशानियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

 नगर पालिका द्वारा त्वरित पहल के बाद भले ही चौक-चौराहों पर ठंडे पानी की व्यवस्था शुरू हो गई हो, लेकिन अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह व्यवस्था पूरे गर्मी सीजन तक लगातार बनी रहेगी या फिर कुछ दिनों बाद यह भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल गर्मी की शुरुआत में कुछ दिनों के लिए व्यवस्थाएं दिखती हैं, लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, व्यवस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं। कई बार घड़े तो रख दिए जाते हैं, लेकिन उनमें नियमित रूप से पानी भरने और साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती, जिससे लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाती।

वहीं, मजदूर वर्ग ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चरचा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में हजारों श्रमिक दिनभर कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में उन्हें शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना न केवल जरूरी है, बल्कि यह उनकी मूलभूत आवश्यकता भी है। श्रमिकों ने मांग की है कि है नगर पालिका अपना काम कर दिया और चौक-चौराहों में पेयजल कि सुविधा दे दी है अब देखना यह है कि एसईसीएल कब खदान क्षेत्रों और कार्यस्थलों पर भी पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करती है।

सूत्रों के अनुसार, यदि इस दिशा में स्थायी योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले मई-जून के भीषण गर्मी के महीनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान के बीच जल संकट से निपटने के लिए अस्थायी उपायों के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनाना बेहद आवश्यक है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पहल को निरंतर बनाए रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर यह व्यवस्था भी समय के साथ ठंडी पड़ जाएगी।

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