जिला कोरिया। भगवान भोलेनाथ के पावन श्रावण मास के आगमन से पहले नगर पालिका शिवपुर चरचा के वार्ड क्रमांक 8 स्थित ऑफिसर कॉलोनी के प्राचीन शिव मंदिर की जर्जर हालत को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी चिंता व्याप्त है। क्षेत्रवासियों एवं शिव भक्तों ने मंदिर के शीघ्र जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की मांग करते हुए एसईसीएल प्रबंधन, नगर पालिका शिवपुर चरचा एवं जनप्रतिनिधियों से तत्काल पहल करने की अपील की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह प्राचीन शिव मंदिर वर्षों से क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। श्रावण मास, महाशिवरात्रि तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहता है। बावजूद इसके मंदिर का रखरखाव लंबे समय से उपेक्षित बना हुआ है।
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त हो चुका है। परिसर की बाउंड्री वॉल कई स्थानों पर टूटकर जर्जर हो गई है। यज्ञ कुंड भी मरम्मत की बाट जोह रहा है। मंदिर परिसर में बिजली के तार बिखरे पड़े हैं, जिससे कभी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। वहीं सूचना बोर्ड भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इन अव्यवस्थाओं के कारण मंदिर की सुंदरता और धार्मिक गरिमा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ ही दिनों में श्रावण मास प्रारंभ होने वाला है, जब प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचेंगे। ऐसे में यदि समय रहते मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन, विद्युत व्यवस्था, प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, यज्ञ कुंड तथा अन्य आवश्यक मरम्मत कार्य नहीं कराए गए, तो श्रद्धालुओं को असुविधा के साथ सुरक्षा संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
शिव भक्तों ने मांग की है कि श्रावण मास शुरू होने से पहले मंदिर का समग्र जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण मिल सके। उनका कहना है कि यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को प्राथमिकता के आधार पर निभानी चाहिए।
श्रद्धालुओं ने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में नियमित साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, बैठने की व्यवस्था तथा हरियाली विकसित किए जाने की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि मंदिर का समुचित विकास किया जाए तो यह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि श्रावण मास में प्रतिदिन सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सोमवार के दिन विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिससे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में जर्जर भवन, टूटी हुई बाउंड्री वॉल और अव्यवस्थित विद्युत व्यवस्था किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मंदिर परिसर का निरीक्षण कर तत्काल आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए, ताकि श्रावण मास में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि समय रहते मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराया जाना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
अब देखना यह होगा कि एसईसीएल प्रबंधन, नगर पालिका शिवपुर चरचा और स्थानीय जनप्रतिनिधि श्रद्धालुओं की इस मांग पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं और श्रावण मास शुरू होने से पहले मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण की दिशा में क्या पहल करते हैं।
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