चरचा कॉलरी में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया बसंत पंचमी महापर्व, विद्यालयों से लेकर कॉलोनियों तक गूंजे मां सरस्वती के जयकारे, अखंड हरि कीर्तन व विशाल भंडारे का हुआ आयोजन


चरचा कॉलरी। नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में मनाया गया। ज्ञान, विद्या, बुद्धि एवं कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के साथ पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिला। विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, कॉलोनियों तथा चौक-चौराहों में मां सरस्वती की प्रतिमा विधिविधान के साथ विराजित कर पूजा-अर्चना की गई।

बसंत पंचमी के अवसर पर नगर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। प्रातः काल से ही मंदिरों, विद्यालय परिसरों एवं सार्वजनिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। मां सरस्वती की पूजा के साथ विद्यार्थियों ने अपने उज्ज्वल भविष्य, विद्या प्राप्ति एवं सफलता की कामना की।
इन विद्यालयों में विराजी मां सरस्वती की प्रतिमा

चरचा क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों हिंद विद्यालय अंग्रेजी माध्यम हायर सेकेंडरी स्कूल, वैष्णवी पब्लिक स्कूल, पीएम श्री शासकीय विद्यालय, सरस्वती शिशु मंदिर, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, स्वामी रामदास स्कूल सहित अन्य विद्यालयों में मां सरस्वती की प्रतिमा विराजमान की गई। सभी स्कूलों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति की प्रार्थना की।
बालिकाएं पारंपरिक परिधान में पहुंचीं विद्यालय

इस पावन अवसर पर छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बालिकाएं पीले एवं रंग-बिरंगे परंपरागत परिधानों एवं साड़ियों में विद्यालय पहुँचीं। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिविधान से पूजा संपन्न हुई। कई विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन एवं सरस्वती वंदना भी प्रस्तुत की गई।
कॉलोनियों व चौक-चौराहों पर भी हुआ आयोजन
बसंत पंचमी केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्हीटीसी कॉलोनी, मेन रोड नेपाल गेट, रेलवे कॉलोनी समेत अनेक वार्डों के चौक-चौराहों पर भी मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई। स्थानीय समितियों एवं युवाओं द्वारा पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ, आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
रीवा समाज द्वारा 24 घंटे का अखंड हरि कीर्तन

बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में रीवा समाज द्वारा पर्व के एक दिन पूर्व 24 घंटे का अखंड हरि कीर्तन आयोजित किया गया। कीर्तन के पश्चात बसंत पंचमी के दिन विशाल वन भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। यह दिन ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व कई स्थानों पर श्री पंचमी एवं सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
पूरे नगर में रहा भक्तिमय माहौल

पूरे दिन नगर में भक्ति संगीत, सरस्वती वंदना, हवन-पूजन और आरती की गूंज सुनाई देती रही। पीले वस्त्रों, फूलों और सजावट से क्षेत्र बसंती रंग में रंगा नजर आया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देकर सामाजिक समरसता का परिचय दिया।

बसंत पंचमी के अवसर पर कई स्थानों पर हवन-पूजन एवं विशेष आरती का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती को पीले पुष्प, अक्षत, कलम-कापी एवं वाद्य यंत्र अर्पित कर विद्या, विवेक एवं संस्कार की कामना की। बच्चों द्वारा पुस्तकों की पूजा कर नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए शुभारंभ किया गया।

कई विद्यालयों में विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, समूह गीत, नृत्य एवं भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बच्चों को बसंत पंचमी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी तथा इसे ज्ञान, अनुशासन और परिश्रम का प्रतीक बताया।

सार्वजनिक स्थलों पर युवाओं एवं सामाजिक समितियों द्वारा आकर्षक विद्युत सज्जा एवं पुष्प सजावट की गई। शाम के समय सामूहिक आरती के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र में दिनभर शांति, सौहार्द एवं भाईचारे का वातावरण बना रहा। पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा भी शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु सतर्कता बरती गई।

बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर नागरिकों ने मां सरस्वती से क्षेत्र में शिक्षा, संस्कार, संस्कृति एवं समृद्धि के निरंतर विकास की कामना की।

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