जिला कोरिया। एसईसीएल चरचा क्षेत्र में अनुकम्पा नियुक्ति और मृत कर्मचारी के जमा फंड हड़पने की साजिश से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। रायगढ़ निवासी एक महिला ने अपने मृत पुत्र के नाम पर एक अन्य महिला द्वारा फर्जी विधवा बनकर नौकरी व संपूर्ण फंड की राशि पर कब्जा जमाने के प्रयास की शिकायत की है। वहीं एसपी कार्यालय द्वारा शिकायत आवेदन स्वीकार नहीं करने पर मामला और गंभीर होता दिख रहा है।
मृतक अविवाहित, फिर भी सामने आई विधवा
पीड़िता सूरज कंवर पति राधेश्याम, जाति कंवर, निवासी ग्राम छाल, तहसील छाल, जिला रायगढ़ (छ.ग.) ने बताया कि उसका पुत्र स्व. नंदकुमार पिता राधेश्याम एसईसीएल चरचा काॅलरी में कार्यरत था और सेवाकाल के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मृतक अविवाहित था, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद भनेश्वरी नामक महिला स्वयं को मृतक की पत्नी / विधवा बताकर अनुकम्पा नियुक्ति और जमा संपूर्ण फंड की राशि
हड़पने के प्रयास में लगी हुई है।
आवेदिका के अनुसार उसके पुत्र का कभी विवाह हुआ ही नहीं, इसलिए महिला पूरी तरह फर्जी तरीके से नौकरी और धन लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
एसपी कार्यालय की भूमिका पर सवाल
पीड़िता के अनुसार यह मामला लेकर जब वह थाना चरचा व पुलिस अधीक्षक कार्यालय बैकुंठपुर पहुंची तो कर्मचारियों ने आवेदन स्वीकार करने से ही इंकार कर दिया।जिससे परिजनों में आक्रोश है।पीड़िता का कहना है कि वह गरीब और न्याय की उम्मीद में आई थी, लेकिन प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण उसकी बात दर्ज नहीं की गई।
पीड़िता पहुंची आईजी के पास इंसाफ मांगने
इस बात को लेकर पीड़िता ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय अम्बिकापुर में आवेदन किया।
एसईसीएल में संगठित फर्जीवाड़े की चर्चा
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह पहला मामला नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि एसईसीएल में कई कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहे हैं, और अनुकंपा नियुक्ति प्रणाली में वर्षों से बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है।
संदिग्ध दस्तावेजों में शामिल -----
फर्जी विवाह प्रमाण पत्र, फर्जी वारिस प्रमाण पत्र, जाली सेवा पुस्तिका दस्तावेज, फर्जी पहचान पत्र यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच शुरू होती है तो पूरे एसईसीएल क्षेत्र में बड़े स्तर पर फर्जी ढांचे के उजागर होने की संभावना जताई जा रही है।
पीड़िता की मांग
आवेदिका का साफ कहना है कि उसका आवेदन स्वीकार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, फर्जी महिला के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए
दिनांक 26 नवंबर 2025 को शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया गया, और अब मामला क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
स्थानीय कामगार संगठनों व आम नागरिकों का कहना है कि यदि इस मामले को दबाने की बजाय विस्तृत जांच कराई गई तो असली दोषियों व गिरोह का खुलासा निश्चित है, साथ ही भविष्य में फर्जी नियुक्तियों पर लगाम लगेगी।
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