जिला कोरिया। जल संरक्षण और भू-जल स्तर में सुधार को लेकर ग्राम पंचायत खरवत में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। शनिवार को गांव में 5% मॉडल सोखता गड्ढा निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह पहल न केवल किसानों के लिए उपयोगी साबित होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में जल प्रबंधन की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत खरवत के सरपंच रामाशंकर सिंह, उप सरपंच श्रीमती उषा देवी, सचिव बनवारी लाल साहू सहित वार्ड पंच मोहरमनिया, परमेश्वरी राजवाड़े, गीता, गौतम कुमार चक्रधारी, आरती एवं शांति की उपस्थिति रही। सोखता गड्ढे का निर्माण किसान बिजेंद्र कुमार के खेत में प्रारंभ किया गया, जहां पंचायत प्रतिनिधियों ने स्थल का निरीक्षण कर कार्य का शुभारंभ किया।
क्या है 5% मॉडल सोखता गड्ढा?
5% मॉडल के तहत खेत के लगभग पांच प्रतिशत हिस्से में सोखता गड्ढा तैयार किया जाता है। वर्षा का पानी जो सामान्यतः बहकर नालों और नदियों में चला जाता है, वह इस गड्ढे के माध्यम से जमीन में समाहित हो जाता है। इससे खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, सिंचाई की लागत घटती है और भू-जल स्तर में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मॉडल से जल संरक्षण के साथ-साथ फसल उत्पादन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह कम लागत में तैयार होने वाला और लंबे समय तक लाभ देने वाला उपाय है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि जल संकट की समस्या को ध्यान में रखते हुए इस मॉडल को अपनाया गया है। गर्मी के मौसम में जलस्तर गिरने से किसानों को सिंचाई में कठिनाई होती है। ऐसे में सोखता गड्ढा वर्षा जल को संरक्षित कर भविष्य में उपयोग योग्य बनाता है।
किसान बिजेंद्र कुमार ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो अन्य किसान भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
पंचायत ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अन्य किसानों के खेतों में भी 5% मॉडल सोखता गड्ढे का निर्माण कराया जाएगा। इससे गांव स्तर पर जल संरक्षण की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
ग्राम पंचायत खरवत की यह पहल क्षेत्र में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।
🌱 जल संरक्षण से आत्मनिर्भर कृषि की ओर कदम
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते मौसम और अनियमित वर्षा के कारण खेती की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे समय में पारंपरिक तरीकों के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना आवश्यक हो गया है। 5% मॉडल सोखता गड्ढा न केवल वर्षा जल को संरक्षित करेगा, बल्कि सूखे की स्थिति में भी खेतों को नमी उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
सचिव बनवारी लाल साहू ने बताया कि यह पहल शासन की जल संरक्षण संबंधी योजनाओं के अनुरूप है और ग्राम पंचायत स्तर पर इसे अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने खेतों में जल संरक्षण के छोटे-छोटे उपाय अपनाएं, जिससे सामूहिक रूप से बड़ा परिवर्तन लाया जा सके।
महिलाओं और युवाओं की भी भागीदारी
कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इससे स्पष्ट है कि जल संरक्षण अब केवल किसानों का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बन चुका है। युवाओं ने भी इस पहल को सराहा और भविष्य में ऐसे कार्यों में सहयोग देने की बात कही।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक किसान अपने खेत का एक छोटा हिस्सा जल संचयन के लिए सुरक्षित रखे, तो गांव स्तर पर जल संकट की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है। इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
ग्राम पंचायत खरवत की यह पहल क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। यदि यह मॉडल व्यापक स्तर पर लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र जल संकट से काफी हद तक उबर सकता है और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
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