अहिंसा से अधिकार तक’ थीम पर बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, वीबी जीरामजी की आईईसी गतिविधियों के अंतर्गत विद्यालयों में हुए विविध आयोजन


जिला कोरिया। विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन (वीबी जीरामजी) से नई पीढ़ी को जोड़ने और योजना की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले में व्यापक स्तर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर कोरिया श्रीमती चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में विद्यालयों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि छात्र-छात्राओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक योजना की जानकारी पहुंच सके।

इन गतिविधियों के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मिलने वाले विभिन्न हितलाभों के संबंध में व्यापक जनसंवाद कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। बच्चों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की यह पहल सराहनीय मानी जा रही है।
‘सूचना, शिक्षा और संचार’ है मुख्य उद्देश्य

जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि वीबी जीरामजी योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार छह सप्ताह तक आईईसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। 26 जनवरी से प्रारंभ हुए इस विशेष अभियान के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों पर कार्यक्रम आयोजित कर लोगों से संवाद किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आगामी मार्च माह के प्रथम सप्ताह तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान योजना से जुड़े सभी तथ्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा, जिससे किसी प्रकार का भ्रम न रहे और श्रमिकों को मिलने वाले लाभों की सटीक जानकारी उन्हें प्राप्त हो सके।

चित्रकला, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन

आईईसी गतिविधियों की श्रृंखला में विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत अकलासरई स्थित हाईस्कूल में छात्र-छात्राओं के बीच ‘अहिंसा से अधिकार तक’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी कल्पनाओं को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

इसके साथ ही महात्मा गांधी सहित अन्य महापुरुषों के योगदान को स्मरण करते हुए निबंध लेखन एवं भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अहिंसा, सत्य और अधिकारों के महत्व पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत कर उपस्थितजनों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों की समझ विकसित करने का प्रयास किया गया। यह पहल न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक संदेश पहुंचा रही है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ