जिला स्तरीय गुरु घासीदास जयंती समारोह 18 दिसंबर को चरचा में भव्य रूप से संपन्न


जिला कोरिया।सतनामी समाज द्वारा जिला स्तरीय गुरु घासीदास जयंती समारोह 2025 का आयोजन 18 दिसंबर 2025, गुरुवार को नगर पालिका शिवपुर चरचा स्थित सुभाष नगर गुरु घासीदास भवन में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया गया। यह आयोजन संत शिरोमणि, मानवता के प्रणेता गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के पावन अवसर पर संपन्न हुआ।कार्यक्रम का आयोजन प्रगतिशील सतनामी समाज जिला कोरिया के तत्वावधान में किया गया।

भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ जयंती समारोह का शुभारंभ

जयंती समारोह के प्रथम चरण में नगर में भव्य गुरु घासीदास जयंती शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। इस दौरान जैतखाम पूजन, साफा फेर एवं पालो चढ़ाने की परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया।शोभायात्रा का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक कोरिया श्री रवि कुर्रे द्वारा किया गया।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित पैकरा रहे।इसी के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े, नगर पालिका अध्यक्ष अरुण कुमार जायसवाल, नपा उपाध्यक्ष राजेश सिंह, पूर्व नपाध्यक्ष श्रीमती लालमुनि यादव, पूर्व मंडल अध्यक्ष अभिमन्यु मुदुली, पुलिस अधीक्षक रवि कुर्रे, सतनामी समाज जिला कोरिया के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र अजगले मंचासीन रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक निराला ने की।इस अवसर पर सभी अतिथियों का साल एवं माला पहनाकर सम्मान किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

इसके पश्चात कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए बालक-बालिकाओं एवं युवाओं द्वारा एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
इसके साथ ही सतनामी समाज के दोने ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

इतिहास और सामाजिक चेतना पर बोले पुलिस अधीक्षक

अपने उद्बोधन में पुलिस अधीक्षक रवि कुर्रे ने सतनामी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष और गुरु घासीदास जी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि औरंगज़ेब के शासनकाल (1665) में जबरन धर्मांतरण और अत्याचार चरम पर थे। उस समय पंजाब के करनौर क्षेत्र में रहने वाले सतनामी समाज के लोगों ने इस्लाम स्वीकार करने से इनकार किया। परिणामस्वरूप समाज पर अत्याचार किए गए और युद्ध की स्थिति उत्पन्न हुई।

उन्होंने बताया कि सतनामी समाज ने औरंगज़ेब की सेना का साहसपूर्वक मुकाबला किया, किंतु बाद में बढ़ते अत्याचारों के कारण समाज के लोग मध्यप्रदेश होते हुए छत्तीसगढ़ आए और यहां अपने विचारों व मानवीय मूल्यों का प्रचार-प्रसार किया।

गुरु घासीदास जी का जीवन मानवता की मिसाल

श्री कुर्रे ने बताया कि गुरु घासीदास जी के पूर्वज मेदनी दास एवं भंगुर दास आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के महान जानकार थे। वे निःशुल्क उपचार कर समाज की सेवा करते थे। गुरु घासीदास जी ने आगे चलकर सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता का संदेश दिया, जो आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहा है।


नगर पंचायत अध्यक्ष मोहित पैकरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि
गुरु घासीदास जी केवल सतनामी समाज के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के मार्गदर्शक थे। उन्होंने मनके मनके एक समान का संदेश देकर समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, भेदभाव और असमानता को समाप्त करने का मार्ग दिखाया। गुरु घासीदास जी का जीवन सत्य, अहिंसा, प्रेम और मानवता पर आधारित था, जिसे आज के समय में अपनाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी द्वारा दिखाया गया मार्ग सामाजिक समरसता, भाईचारे और समान अधिकारों की भावना को मजबूत करता है। उनके विचार आज भी समाज को एकजुट रखने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। मोहित पैकरा ने सतनामी समाज की एकता, अनुशासन और सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज शिक्षा, सेवा और संस्कार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है।

अंत में उन्होंने गुरु घासीदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि तभी एक समतामूलक, सशक्त और विकसित समाज का निर्माण संभव है।

समाज में एकता और समरसता का संदेश

समारोह के दौरान वक्ताओं ने गुरु घासीदास जी के मनखे-मनखे एक समान के सिद्धांत को आत्मसात करने का आह्वान किया तथा समाज में शिक्षा, संगठन और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर बल दिया।

कार्यक्रम का समापन शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ किया गया।इस दौरान सतनामी समाज के सैकड़ों सदस्य महिला पुरुष बच्चे सहित नगरवासी मोजूद रहै।

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