चरचा कॉलरी।नगर पालिका शिवपुर चरचा के श्रमवीर स्टेडियम, बाजार पारा में शनिवार दोपहर 3 बजे भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सर्व हिन्दू समाज के महिला, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे। सम्मेलन का उद्देश्य सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता एवं राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को सशक्त करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रान्त प्रचारक (छत्तीसगढ़) अजय राम जी रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में चन्द्र प्रताप तिवारी, राणा प्रताप सिंह, श्याम नारायण यादव, हरियाणा अग्रवाल, बलराम प्रधान, नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश सिंह, पार्षद कुमुद मिश्रा, प्रदीप तिवारी, कुण्डल सायं, भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपा विश्वकर्मा, वरिष्ठ पत्रकार नीरज गुप्ता, पत्रकार अंकित अग्रवाल, राजू सिंह, शशि भूषण राय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया।
इसके पश्चात रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।हिन्दू विद्यालय इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल एवं सरस्वती शिशु मंदिर, चरचा के विद्यार्थियों ने भक्ति गीत, छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य एवं कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
हिन्दू विद्यालय इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” विषय पर नाटक प्रस्तुत कर समाज को जागरूक करने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि प्रान्त प्रचारक अजय राम ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतवर्ष कभी विश्व को दिशा देने वाला जगतगुरु राष्ट्र रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों से पूरी दुनिया ज्ञान प्राप्त करने आती थी। शिक्षा, विज्ञान, कला, संगीत, चिकित्सा और उद्योग हर क्षेत्र में भारत अग्रणी रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को पुनः श्रेष्ठ, शक्तिशाली और समर्थ राष्ट्र बनाना है तो इसकी शुरुआत परिवार से करनी होगी। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और यहीं से संस्कारों का बीजारोपण होता है। मां को प्रथम गुरु बताते हुए उन्होंने कहा कि बालक के व्यक्तित्व और भविष्य निर्माण में मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
अजय राम ने कहा कि जब समाज में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले, अनुशासित, परिश्रमी और संस्कारी नागरिक तैयार होंगे, तभी देश प्रगति करेगा। जापान और इजराइल जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां के नागरिकों में देशभक्ति का भाव ही उनकी ताकत है।
स्वामी विवेकानंद के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद) ने साधारण लक्ष्य से शुरुआत की, लेकिन माता के संस्कार और आत्मबल से वे विश्वविख्यात संन्यासी बने। यही संदेश आज के समाज के लिए भी प्रासंगिक है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति के संदेश और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ किया गया।
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