उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान के तहत रविवार को हुआ महापरीक्षा का आयोजन, साक्षरता के प्रति दिखा जोश—बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, 77 वर्षीय मटूक लाल बने प्रेरणा


जिला कोरिया।राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कंडिका 23 “सबके लिए शिक्षा” के अनुरूप जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान के महापरीक्षा दिवस का आयोजन रविवार को व्यापक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। साक्षरता के प्रसार को जन–अभियान का रूप देने के उद्देश्य से कलेक्टर के मार्गदर्शन में पूर्व से ही जनजागरूकता अभियानों की श्रृंखला चलाई गई थी, जिसके स्पष्ट सकारात्मक परिणाम परीक्षा के दिन देखने को मिले।
प्रचार-प्रसार ने अभियान को दिया जन–आंदोलन का रूप

परीक्षा में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें मशाल रैली, कोटवार द्वारा मुनादी, दीवारों पर साक्षरता संदेश लेखन, जन-जागरूकता रैली, 

इन प्रयासों ने गाँव–गाँव और घर–घर तक शिक्षा का संदेश पहुँचाया और शिक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। अभिभावकों, युवाओं, महिलाओं से लेकर बुजुर्गों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई।
303 परीक्षा केंद्रों में हुआ महाआयोजन

जिले भर में 303 परीक्षा केंद्रों में महापरीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की मौजूदगी में परीक्षा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। प्रमुख केंद्रों में व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की गई तथा परीक्षार्थियों के स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए। कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों को प्रेरक संदेश और मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

साक्षरता की मिसाल — उम्र नहीं रुके सीखने का जज़्बा

महापरीक्षा में प्रतिभागियों में वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति ने सभी का मन मोह लिया और शिक्षा की वास्तविक भावना को जीवंत कर दिया।सबसे प्रेरणादायक उपस्थिति 77 वर्षीय मटूक लाल (टेंगनी, संकुल मनसुख ब) की रही, जिन्होंने उत्साह के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया।
इसी तरह एक बुजुर्ग महिला अपनी पोती के साथ परीक्षा देने पहुँचीं। उन्होंने कहा सीखना जीवनभर संभव है, बस इच्छा होनी चाहिए। इसके अलावा 65 वर्षीय सीताराम और उनकी उतनी ही आयु की पत्नी प्राणपति (प्राथमिक शाला लालमटिया) ने भी परीक्षा देकर साक्षरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का शानदार संदेश दिया।

बुजुर्गों की इस सहभागिता ने परीक्षा केंद्रों में मौजूद सभी लोगों को प्रेरित किया और अभियान को विशेष आयाम दिया।

सीमा क्षेत्र गोयनी में भी दिखा शानदार उत्साह

छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश सीमा से लगे गोयनी ग्राम (संकुल केंद्र  रामगढ़ सी) में भी महापरीक्षा का आयोजन अत्यंत उत्साह के साथ हुआ।परीक्षार्थियों का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया गया तथा शिक्षित बनकर जीवन को अधिक सरल, बेहतर और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सीमा क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यहाँ अभूतपूर्व सहभागिता रही, जो अभियान की गहरी पहुँच और सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।

अभियान ने रचा नया संदेश — “सीखना हर उम्र में संभव”

महापरीक्षा के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं, बल्कि यह सभी आयु वर्ग के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। साक्षरता, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता की दिशा में यह परीक्षा जिले के लिए ऐतिहासिक कदम साबित हुई है।

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