चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के चरचा आरओ वेस्ट मुहाडे में वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर श्रमिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। 7 दिसंबर को पांच श्रमिक संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से धरना प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, लेकिन निर्धारित दिन पर सिर्फ बीएमएस यूनियन ही मैदान में उतरी।
8 दिसंबर की सुबह लगभग 6 बजे बीएमएस यूनियन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कामगारों ने वेस्ट मुहाडे पर पहुंचकर धरना देकर जोरदार नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ विरोध दर्ज किया।
वेतन भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी
आमतौर पर हर महीने श्रमिकों को 2 से 3 तारीख के भीतर वेतन भुगतान किया जाता है, लेकिन इस बार 8 दिसंबर तक भी मजदूरों को वेतन प्राप्त नहीं हुआ। इससे श्रमिकों में रोष व्याप्त है तथा घरेलू खर्च एवं आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण श्रमिक संगठनों ने वेतन भुगतान में लापरवाही कर रहे प्रबंधन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में कामगारों का वेतन भुगतान कर दिया गया है, लेकिन बैकुंठपुर क्षेत्र में अब तक मजदूरों को भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते श्रमिकों में आक्रोश बढ़ रहा है।
श्रम कानून के उल्लंघन का आरोप
बीएमएस यूनियन ने 8 सूत्रीय मांगों को लेकर सह क्षेत्र प्रबंधक को सौंपा ज्ञापन, वेतन भुगतान में देरी पर जताई कड़ी नाराज़गी, आंदोलन की चेतावनी
बैकुंठपुर क्षेत्र में कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी के मुद्दे पर बीएमएस यूनियन ने सोमवार को एसईसीएल सह क्षेत्र प्रबंधक को आठ सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। यूनियन ने चेतावनी दी है कि हर माह तय तिथि पर पगार नहीं मिलने से कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है और स्थिति जस की तस बनी रही तो धरना प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल की राह अपनाई जाएगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
वेतन में विलंब बना मुख्य मुद्दा
ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों को 2 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन हर महीने भुगतान में देरी की जा रही है। इसके कारण कर्मचारियों का आजीविका संचालन प्रभावित हो रहा है और परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। यूनियन ने मांग की कि वेतन भुगतान सुनिश्चित समय सीमा में अनिवार्य रूप से कराया जाए।
सलमान के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर आपत्ति
यूनियन ने ज्ञापन में चरचा आरओ के कर्मचारी सलमान को प्रबंधक द्वारा कथित रूप से अनाधिकृत निर्माण के आरोप में परेशान किए जाने का भी मुद्दा उठाया है। यूनियन ने कहा कि बैकुंठपुर क्षेत्र में अधिकांश कंपनी आवासों तथा कंपनी की भूमियों पर वर्षों से अनाधिकृत निर्माण मौजूद हैं, ऐसे में एकरूपता न अपनाकर विशेष रूप से सलमान को निशाना बनाना गलत है। यूनियन ने चेतावनी दी या तो पूरे क्षेत्र में बिना भेदभाव के एक समान कार्रवाई की जाए, अन्यथा सलमान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई तत्काल बंद की जाए।
नाली सफाई और सीएचपी में कार्य प्रणाली पर भी आपत्ति
ज्ञापन में कहा गया है कि सभी कालोनियों में नाली सफाई कार्य बंद पड़ा हुआ है, जिसके कारण नागरिक तथा कर्मचारी असुविधा झेल रहे हैं। यूनियन ने सफाई कार्य तुरंत शुरू कराने की मांग की।इसके साथ ही सीएचपी में ट्रेनी कामगारों से हाजिरी बाबू का कार्य कराए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। यूनियन अनुसार पहले कार्यरत हाजिरी बाबू को अन्य कार्यों में भेजकर ट्रेनी से हाजिरी का काम लेना प्रबंधन की मनमानी और श्रमिक शोषण है।
सेवानिवृत्त कामगारों को एरियस–बोनस न मिलना गंभीर
एनसीडब्ल्यू 11 समय के सेवानिवृत्त कामगारों को आज दिनांक तक एरियर, बोनस और अन्य देयकों का भुगतान न किए जाने को यूनियन ने गंभीर लापरवाही बताया और इनका भुगतान तुरंत किए जाने की मांग की।
सेप सिस्टम में अनियमितताओं की शिकायत
बीएमएस यूनियन ने ठेकेदारी कामगारों की उपस्थिति सेप प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित कराने और उन्हें एचपीसी भुगतान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही पूर्व जारी कार्यालय आदेश क्रमांक 477 दिनांक 27/05/2025 के अब तक क्रियान्वित न होने पर भी असंतोष जताया। यूनियन ने यह भी पूछा कि क्या सेप सिस्टम में कर्मचारियों की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज हो रही है या नहीं इसकी स्पष्टता प्रबंधन द्वारा अनिवार्य रूप से दी जाए।
आंदोलन की चेतावनी
अंत में यूनियन ने स्पष्ट कहा कि यदि आठों मांगों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो श्रम संघ आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा और उसके बाद उत्पन्न होने वाली सभी परिस्थितियों की जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन पर होगी।
इसी प्रकार कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) ने अपने लेटर पैड पर एसईसीएल प्रबंधक को पत्र जारी किया है, जिसमें श्रम कानून अधिनियम वेतन संहिता 1936 का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोल उद्योग में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर वेतन मिलना अनिवार्य है। कानून के अनुसार महीने के अंत के 7 दिनों के भीतर वेतन भुगतान होना चाहिए, लेकिन देरी से श्रमिक परेशान और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि जल्द वेतन भुगतान नहीं किया गया तो श्रमिक धरना, काम बंद एवं भूख हड़ताल करने बाध्य होंगे, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
यूनियन की कड़ी चेतावनी
धरना स्थल पर बीएमएस यूनियन के सचिव जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा 8 दिसंबर तक भुगतान न होने पर हम सभी कामगारों ने एक दिवसीय धरना किया है। यदि आज दिनांक तक श्रमिकों के खातों में वेतन नहीं आता है तो 9 दिसंबर से असहयोग आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह तो सिर्फ शुरुआत है, यदि समय रहते प्रबंधक ने ध्यान नहीं दिया तो हर परिणाम की जिम्मेदारी प्रबंधन पर ही होगी।”
श्रमिकों का सामूहिक रोष
धरना कार्यक्रम में बीएमएस श्रमिक संगठन के यूनिट जेसीसी एवं केंद्रीय कार्य समिति सदस्य जितेंद्र श्रीवास्तव, विनोद दुबे सहित बड़ी संख्या में कामगार शामिल हुए।
सभी श्रमिकों ने एक स्वर में चेतावनी दी यदि आज तक भुगतान नहीं हुआ तो सभी श्रमिक काम बंद करेंगे इसके बाद आंदोलन चरणबद्ध रूप से तेज किया जाएगा
धरना स्थल पर श्रमिकों की भारी उपस्थिति और गूंजते नारे स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि वेतन मामले पर अब समझौते की गुंजाइश कम रह गई है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रबंधन भुगतान करता है या आंदोलन और उग्र रूप लेता है।
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