चरचा कॉलरी। नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र में विकास के नाम पर भव्य लोकार्पण और चमक-दमक तो दिखाई दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। नगर के ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्थलों की हालत यह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की प्रतिमाएं आज अंधेरे, गंदगी और उपेक्षा के साए में खड़ी हैं।
महात्मा गांधी पार्क एवं राजीव गांधी चौक में न तो नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था है और न ही रात्रिकालीन प्रकाश की समुचित व्यवस्था। अंधेरे के कारण ये स्थान धीरे-धीरे असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं। शाम होते ही इन पार्कों और चौकों में शराब, गांजा जैसे नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन किया जाता है, जिससे क्षेत्र का सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है।
अटल परिसर में रौशनी, गांधी–राजीव चौक में अंधेरा
हाल ही में नगर पालिका क्षेत्र में निर्मित अटल परिसर का लोकार्पण समारोह बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। मंच, सजावट, लाइटिंग और प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी गई, लेकिन इसी नगर में स्थित महापुरुषों की प्रतिमाएं आज भी सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था की बाट जोह रही हैं। यह विरोधाभास नगर प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पार्क बनते जा रहे नशे का अड्डा.......
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चरचा कॉलरी क्षेत्र में ऐसे कई पार्क हैं, जहाँ अंधेरा और गंदगी पसरी हुई है। देखरेख के अभाव में ये पार्क नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का इन सार्वजनिक स्थलों पर जाना लगभग बंद हो गया है। सुरक्षा और सामाजिक मर्यादा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
हर सरकार सिर्फ नए काम गिनाती है......
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि चाहे कोई भी सरकार आए, ध्यान सिर्फ नए निर्माण और उद्घाटन तक सीमित रहता है। पूर्व में बने चौक-चौराहों, पार्कों और प्रतिमाओं की देखरेख पर कोई ध्यान नहीं देता। विकास के नाम पर करोड़ों खर्च हो जाते हैं, लेकिन जनता के लिए बने सार्वजनिक स्थल बदहाल होते जा रहे हैं।
नगर पालिका से उठी सख्त मांग.....
आक्रोशित नागरिकों ने नगर पालिका शिवपुर चरचा से मांग की है कि महात्मा गांधी पार्क, राजीव गांधी चौक सहित सभी सार्वजनिक स्थलों की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था हो तथा असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही इन स्थलों की नियमित निगरानी और रखरखाव की ठोस व्यवस्था लागू की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर प्रशासन महापुरुषों के सम्मान और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर होगा, या फिर विकास सिर्फ लोकार्पण और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह जाएगा?
0 टिप्पणियाँ