चरचा आरओ। लंबे समय से चल रही वेतन देरी की समस्या पर आखिरकार कामगारों की आवाज़ बुलंद हुई और परिणाम भी निकला।
आपकी बात लाइव समाचार का असर प्रबंधक ने कामगारों का नवम्बर माह का वेतन भुगतान कर दिया। जैसे ही भुगतान कर्मचारियों के खातों में पहुंचा, कामगारों में राहत और खुशी का माहौल बन गया। कर्मचारियों ने कहा कि यदि आपकी बात लाइव व हरिभूमि समाचार पत्र के संवाददाता एवं यूनियन के प्रतिनिधियों ने आवाज़ न उठातीं तो भुगतान कब होता कहना मुश्किल था। वहीं यूनियनों ने इसे श्रमिक एकता और संघर्ष की जीत बताया।
बीएमएस यूनियन द्वारा सह क्षेत्र प्रबंधक को आठ सूत्रीय मांग पत्र सौंपने तथा चरचा वेस्ट मुहाडे पर धरना–प्रदर्शन के बाद आखिरकार सोमवार कि शाम 8:30 मे कामगारों के खातों में नवम्बर माह का वेतन भुगतान कर दिया गया।
कामगारों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि यदि यूनियनें आगे नहीं आतीं तो भुगतान कब तक लटका रहता, कहना मुश्किल था। वहीं यूनियनों ने इसे श्रमिक एकता की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा ताकि हर माह वेतन समय पर मिले।
प्रबंधन पर दबाव के बाद हुआ भुगतान
सूत्रों के अनुसार बीएएमएस व एचएमएस यूनियनों द्वारा चेतावनी दिए जाने के बाद प्रबंधन पर खासा दबाव बना।
बीएमएस यूनियन और एचएमएस यूनियन के संयुक्त आंदोलन के संकेत के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हुआ, जिसके बाद लंबित वेतन फाइलों को प्राथमिकता पर निपटाया गया और देरी से लटके हुए भुगतान आदेश को मंजूरी देकर बैंकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
यूनियनों ने चेताया संघर्ष अभी समाप्त नहीं बीएमएस यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ़ वेतन भुगतान तक सीमित मुद्दा नहीं है, आठ सूत्रीय मांगों पर ठोस सुधार किए बिना संघर्ष बंद नहीं होगा। यूनियन ने कहा कि वेतन भले मिल गया हो, लेकिन सलमान प्रकरण में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई रोकने, सभी कालोनियों में नाली सफाई चालू कराने, सीएचपी में ट्रेनी से हाजिरी का कार्य बंद कराने, सेवानिवृत्त कामगारों के एरियस–बोनस भुगतान, ठेका कामगारों की उपस्थिति में SEAP सिस्टम को पारदर्शी बनाने कार्यालय आदेश क्रमांक 477 के पूर्ण क्रियान्वयन जैसे मुख्य मुद्दे अब भी लंबित हैं।
एचएमएस यूनियन ने भी संयुक्त स्वर में कहा कि यदि समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो अगला चरण बड़ा होगा।
कामगार बोले अब हर महीने तय तारीख पर पगार हो, कर्मचारियों ने खुशी तो जताई लेकिन भविष्य को लेकर चिंता भी रखी। एक कर्मचारी ने कहा हर महीने धरना और ज्ञापन के बाद वेतन मिले, यह भी अन्याय है। कंपनी समय सीमा तय करे और उसका पालन हो।
आगे की राह
यूनियन के प्रतिनिधियों ने प्रबंधन को लिखित रूप से जवाब देने के लिए कुछ दिन की समय सीमा तय की है। इस दौरान कार्रवाई न होने पर सामूहिक प्रदर्शन, कार्य बहिष्कार व भूख हड़ताल जैसे चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करने की तैयारी पहले ही शुरू कर दी गई है।
स्पष्ट संकेत चरचा आरओ में वेतन व्यवस्था और श्रमिक प्रशासन को सुधारना अब प्रबंधन की अनिवार्य प्राथमिकता बन चुका है। वेतन भुगतान तो हुआ, लेकिन संघर्ष यहीं नहीं रुकेगा यूनियनों ने साफ कहा है कि श्रमिक अधिकारों पर समझौता नहीं किया जाएगा।
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