बरबसपुर साप्ताहिक बाजार में ऑटो चालकों की मनमानी चरम पर, छोटे दुकानदारों की रोज़ी-रोटी पर मंडरा रहा संकट

जिला कोरिया। एमसीबी जिले के ग्राम पंचायत बरबसपुर के साप्ताहिक बाजार में ऑटो चालकों की मनमानी अब गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है। सप्ताहिक बाजार के दिन दर्जनों ऑटो चालक घंटों तक दुकानों के सामने अपने वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाता है। स्थिति यह है कि बाजार में अव्यवस्था और तनाव का माहौल बना रहता है।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि ऑटो चालक जानबूझकर दुकानों के ठीक सामने वाहन खड़ा कर देते हैं, जिससे दुकानें पूरी तरह दिखाई ही नहीं देतीं। ग्राहक जब दुकान तक पहुंचना चाहते हैं तो उन्हें वाहन हटाने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे अधिकांश ग्राहक बिना खरीदी किए लौट जाते हैं। इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों की दैनिक आमदनी पर पड़ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार जब दुकानदार विनम्रतापूर्वक ऑटो चालकों से वाहन आगे-पीछे करने का अनुरोध करते हैं तो वे झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। कई बार तो बात गाली-गलौज और धमकी तक पहुंच जाती है। इससे बाजार में भय का माहौल बन गया है और दुकानदार अपनी बात रखने से भी डरने लगे हैं।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी न होने पर ऑटो चालक सड़क के बीचों-बीच वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है और घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

हालात यह हैं कि जैसे ही शाम के समय नागपुर चौकी की पुलिस वाहन की सायरन सुनाई देती है, ऑटो चालक तुरंत मौके से फरार हो जाते हैं। पुलिस के जाते ही फिर वही स्थिति बन जाती है। यह सिलसिला हर सप्ताह दोहराया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

छोटे दुकानदारों का कहना है कि जब उनकी दुकान ऑटो वाहनों की आड़ में पूरी तरह छिप जाती है, तब वे अपना सामान बेच ही नहीं पाते। कई दुकानदारों ने बताया कि साप्ताहिक बाजार ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है। यदि इसी तरह दुकानें ढंकी रहेंगी तो वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे, यह सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं ग्राम पंचायत से मांग की है कि साप्ताहिक बाजार के दिन ऑटो स्टैंड के लिए अलग स्थान चिन्हित किया जाए। साथ ही दुकानों के सामने वाहन खड़ा करने वाले ऑटो चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित पुलिस निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि बाजार व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।

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