जिला कोरिया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जिले में केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की मजबूत आधारशिला बन रही है। व्यक्तिगत एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से योजना ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत ग्राम कैलाशपुर की निवासी उर्मिला और उनके पति मंगल की।
पानी की समस्या से जूझता परिवार
उर्मिला का परिवार लंबे समय से गंभीर जल संकट से परेशान था। पीने के पानी और घरेलू उपयोग के लिए उन्हें दूर स्थित हैंडपंप तक बार-बार जाना पड़ता था। पानी की कमी के कारण वे अपनी जमीन पर खेती या सब्जी उत्पादन की कल्पना भी नहीं कर पाते थे। जल अभाव ने उनके जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति को वर्षों तक सीमित कर रखा था।
मनरेगा से मिला समाधान
परिवार की इस समस्या को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2023-24 में मनरेगा के अंतर्गत व्यक्तिगत कूप निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई। इस कार्य हेतु 2 लाख 59 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई तथा ग्राम पंचायत कैलाशपुर के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा में कूप का निर्माण पूर्ण कराया गया।
बढ़ी सिंचाई, बढ़ी आमदनी
कूप निर्माण के बाद उर्मिला के परिवार के जीवन में व्यापक परिवर्तन आया। अब उन्हें पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे विशेष रूप से घर की महिलाओं का समय और श्रम बच रहा है। सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से परिवार ने अपनी बाड़ी में खेती प्रारंभ की। वर्तमान में उर्मिला आलू, गोभी और मटर जैसी सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं, जिन्हें वे बाजार में बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
एक कूप, कई खुशियां
अपनी खुशी व्यक्त करते हुए उर्मिला कहती हैं इस कुएं ने हमारी जिंदगी बदल दी है। पहले पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन अब हमारे पास पर्याप्त पानी है। हम सब्जियां उगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। यह कुआं हमारे लिए खुशहाली की नई धारा बन गया है। उर्मिला की यह कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि मनरेगा जैसी योजनाएं सही क्रियान्वयन के माध्यम से कैसे ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकती हैं।
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