जिला कोरिया। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर विश्वशांति विश्वपदयात्रा टीम कोरिया जिले पहुँची, जहाँ टीम के सदस्यों ने विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। टीम के प्रमुख सदस्यों अवध बिहारी लाल, जितेन्द्र प्रताप, महेन्द्र प्रताप एवं डेंजरस एडवेंचर्स स्पोर्ट्स के सदस्य व प्रसिद्ध पर्वतारोही गोविन्दा नन्द ने जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी से सौजन्य मुलाकात की।
यह टीम भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निरंतर जनजागरूकता अभियान चला रही है। विश्वशांति विश्वपदयात्रा एवं रथयात्रा के माध्यम से टीम छत्तीसगढ़ सहित देशभर में सामाजिक सरोकारों को लेकर जनमानस को जागरूक कर रही है।
टीम द्वारा अब तक विश्व के 11 देशों में 4 लाख 52 हजार किलोमीटर की ऐतिहासिक विश्वशांति पदयात्रा पूर्ण की जा चुकी है। वर्ष 2018 में इस अभियान के अंतर्गत टीम ने विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक सफल यात्रा कर एक और कीर्तिमान स्थापित किया। पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए अब तक 14 करोड़ 50 लाख पौधों का रोपण कराया जा चुका है। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पहुँचकर जागरूकता कार्यक्रम एवं स्थलीय निरीक्षण भी किया गया है।
टीम देश के लगभग 600 जनपदों में विश्वशांति पदयात्रा कर चुकी है, जिसमें उत्तराखंड के 13, उत्तर प्रदेश के 75, मध्यप्रदेश, राजस्थान के सभी 33, गुजरात के 33, केंद्र शासित प्रदेश दमन-दीव एवं गोवा तथा महाराष्ट्र के 36 जनपद शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से अब तक 28 जिलों में विश्वशांति पदयात्रा एवं रथयात्रा सफलतापूर्वक सम्पन्न हो चुकी है।
जिला कोरिया पहुँचकर टीम द्वारा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में 24 दिसंबर को टीम ने आम नागरिकों से संवाद कर विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों का संदेश दिया।
इस ऐतिहासिक विश्वशांति पदयात्रा की शुरुआत 30 जुलाई 1980 को उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी से अवध बिहारी लाल द्वारा की गई थी। वर्ष 2001 में वर्तमान सदस्य इस अभियान से जुड़े और आज यह टीम 20 सदस्यों के स्वरूप में निरंतर कार्य कर रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 1980 से पूर्व आई भीषण बाढ़ के दौरान श्री अवध बिहारी लाल का पूरा परिवार जलमग्न क्षेत्र में फँस गया था। उस भयावह स्थिति में उन्होंने एक बरगद के पेड़ को पकड़कर कई घंटों तक संघर्ष किया और अंततः भारतीय सेना व रेस्क्यू टीम द्वारा उनका जीवन बचाया गया। इसी घटना ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण, वन एवं जल संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत अभियान, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ और मतदाता जागरूकता जैसे सामाजिक उद्देश्यों के लिए जीवन समर्पित करने की प्रेरणा दी।
इस विश्वशांति यात्रा के दौरान टीम का एक साथी अपने कर्तव्य पथ पर शहीद भी हो चुका है, जो इस अभियान की गंभीरता और समर्पण को दर्शाता है।
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