लिंग आधारित हिंसा समाप्ति हेतु जागरूकता अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत स्वास्थ्य मितानिनों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम संपन्न



जिला कोरिया। महिलाओं और बालिकाओं के प्रति होने वाली हिंसा की रोकथाम तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में व्यापक जागरूकता पहल शुरू की गई है। कलेक्टर कोरिया श्रीमती चंदन त्रिपाठी के दिशा-निर्देश तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत आज बैकुंठपुर स्थित चाइल्ड लाइन कार्यालय में स्वास्थ्य मितानिनों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आई स्वास्थ्य मितानिनों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा लिंग आधारित हिंसा के प्रकार, इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक कारण, कानूनी संरक्षण, दंड प्रक्रिया तथा हिंसा की रोकथाम में समुदाय की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस पहल का उद्देश्य मितानिनों को ऐसी परिस्थितियों की पहचान करने में सक्षम बनाना है, ताकि वे गांव और मोहल्लों में महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के साथ होने वाले अत्याचार, शोषण या उत्पीड़न की जानकारी समय रहते संबंधित विभागों तक पहुँचा सकें और पीड़ितों को सहयोग दिला सकें।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निम्न प्रमुख विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया महिलाओं एवं किशोरियों से जुड़े प्रमुख कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, सखी वन स्टॉप सेंटर द्वारा उपलब्ध सहायता सेवाएँ, शक्ति सदन की भूमिका और महिला संरक्षण प्रावधान, अनैतिक मानव व्यापार से संरक्षण के उपाय, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नियम एवं लाभ के विभिन्न हिस्सों कि जानकारी दी गई।
विशेषज्ञ वक्ताओं ने बताया कि मितानिनें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और मातृ-शिशु देखभाल की प्रमुख कड़ी होने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता की भी सशक्त प्रतिनिधि हैं। यदि वे हिंसा के मामलों की प्रारंभिक पहचान कर पीड़ितों को संस्थागत सहायता से जोड़ें, तो महिलाओं व बच्चों के प्रति अपराधों में उल्लेखनीय कमी लाना संभव है।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण, केस स्टडी और हेल्पलाइन नंबरों चाइल्डलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, पुलिस 112 — के उपयोग की जानकारी प्रदान की गई, ताकि वे ग्राउंड लेवल पर बेहतर तरीके से कार्य कर सकें।

जिला प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार के उन्मुखीकरण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में लैंगिक समानता, महिला सुरक्षा और हिंसा मुक्त वातावरण के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूती मिल सके।

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