चरचा आरओ में भुगतान संकट गंभीर — कर्मचारियों में उबाल, 8 दिसंबर को चरचा वेस्ट मुहाड़ा में पांचों श्रम संघ करेंगे बड़ा प्रदर्शन, चेतावनी — “समय पर वेतन नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र होगा




चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के चरचा आरओ में भुगतान संकट गहराता जा रहा है। जहां सामान्य परिस्थितियों में हर माह की 2 तारीख तक वेतन वितरण पूरा हो जाता है, वहीं इस माह कामगारों को तय तिथि के बाद भी पगार नहीं दी गई है। लगातार देरी से कर्मचारी परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। महंगाई के दौर में वेतन न मिलना कामगारों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, जिसके चलते यहाँ गहरा असंतोष और नाराजगी फैलती जा रही है।
कामगारों ने बताया कि वेतन की देरी के कारण घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। राशन, बिजली बिल, बच्चों की फीस, बैंक की किश्तें और दैनिक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कई श्रमिकों ने कहा कि वे मजदूर हैं, महीने की कमाई पर पूरा परिवार चलता है — ऐसे में वेतन न मिलना सीधे जीवन पर असर डाल रहा है।

इस मामले में प्रबंधन की चुप्पी और तंत्र की धीमी कार्यप्रणाली पर कर्मचारियों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। विरोध की बढ़ती भावना को देखते हुए सभी पांच श्रमिक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की राह पकड़ने का एलान किया है। श्रम संघों की आपात बैठक में निर्णय लिया गया कि 8 दिसंबर को चरचा वेस्ट मुहाड़ा में एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में कामगार शामिल होंगे।

श्रम संघ प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि वेतन समय पर भुगतान होना कामगारों का अधिकार है देरी से मजदूरों के जीवन पर सीधा असर पड़ता है यदि दिसंबर माह का वेतन तुरंत जारी नहीं किया गया तो यह सिर्फ शुरुआत होगी।

यूनियन नेताओं द्वारा यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि भुगतान व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को जिले स्तर और आवश्यकता पड़ने पर क्षेत्रीय स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। इसमें तालाबंदी, कार्य बहिष्कार और बड़े पैमाने पर औद्योगिक अवरोध की संभावनाएँ भी शामिल हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और मजदूर परिवारों में भी इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। कई कामगारों ने कहा कि प्रबंधन को वेतन भुगतान जैसी मूलभूत आवश्यकता पर पूरी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

अब सभी की निगाहें 8 दिसंबर के प्रस्तावित धरना प्रदर्शन पर टिक गई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदर्शन के दबाव में प्रबंधन स्थिति का संज्ञान लेते हुए वेतन वितरण की प्रक्रिया तेज करेगा। वहीं श्रमिक संगठन स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि वेतन भुगतान नियमित नहीं हुआ तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।

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